UP Police | लखनऊ | 11 मई, 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ लखनऊ पुलिस लाइन्स में तैनात 2015 बैच के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने पुलिस विभाग के आंतरिक भ्रष्टाचार और जर्जर व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिपाही ने एक के बाद एक तीन वीडियो जारी कर विभाग की ‘सामंती’ कार्यशैली और कर्मचारियों की बदहाली का कच्चा चिट्ठा पेश किया है।
“अनुशासन का खौफ ऐसा बन गया है कि बेचारे सिपाही अपनी बात भी नहीं कर पाते। मैं अपनी जान हथेली पर रखकर बोल रहा हूँ।” — सुनील कुमार शुक्ला
वीडियो 1: सामंती व्यवस्था और शोषण का आरोप
अपने पहले वीडियो में सुनील शुक्ला ने वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग आज भी अंग्रेजों के जमाने की मानसिकता से चल रहा है, जहाँ निचले स्तर के कर्मचारियों का मानसिक शोषण किया जाता है। उन्होंने इसे “काले अंग्रेजों का राज” करार दिया है।
Watch First video Of Sunil Shukla
वीडियो 2: ड्यूटी के नाम पर ₹2000 की वसूली
दूसरे वीडियो में सिपाही ने सीधे तौर पर आर्थिक भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि रिजर्व लाइन्स में ‘अच्छी ड्यूटी’ (गणना या ऑफिस वर्क) पाने के लिए सिपाहियों को हर महीने ₹2000 की रिश्वत देनी पड़ती है। उन्होंने इस वसूली को ‘जमींदारी प्रथा’ की संज्ञा दी है।
वीडियो 3: “भैंसों के तबेले” जैसी बैरकें और सीएम से गुहार
तीसरे और सबसे ताज़ा वीडियो में सुनील ने पुलिसकर्मियों के रहने की अमानवीय स्थितियों को उजागर किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए उन्होंने निम्नलिखित गंभीर बातें कहीं:
- पुलिस बैरकें “भैंसों के तबेले” और “हॉट चैंबर” जैसी हो गई हैं।
- बारिश के दौरान बैरकों में पानी भर जाता है, जिससे वर्दी, जूते और राशन पानी में तैरने लगते हैं।
- शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय है, जिससे पुलिसकर्मी मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
- उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थितियों में रहकर पुलिस आधुनिक और संवेदनशील कैसे बन सकती है।
Wathc 3rd Video of Sunil Kumar Shukla:
प्रशासनिक कार्रवाई और विभाग का पक्ष
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने इन वीडियो का संज्ञान लेते हुए जाँच के आदेश दे दिए हैं। डीसीपी (लाइन्स) अनिल कुमार यादव ने पूरे प्रकरण की जाँच एसीपी (महिला अपराध) को सौंपी है। हालाँकि, पुलिस विभाग इसे अनुशासनहीनता मान रहा है क्योंकि सिपाही ने अपनी बात रखने के लिए विभागीय माध्यम के बजाय सोशल मीडिया का सहारा लिया है।
निष्कर्ष
सिपाही सुनील शुक्ला ने मुख्यमंत्री से एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर इस पूरे तंत्र की जाँच करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति (बलिदान) देने के लिए भी तैयार हैं। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और पुलिस सुधारों की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई है।