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भारतीय राजनीति में आज एक ऐतिहासिक भूचाल आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने अपनी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। यह केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं है, बल्कि AAP की संसदीय शक्ति में एक बड़ी दरार है।
7 सांसदों के साथ BJP में विलय (The 2/3rd Split Strategy)
राघव चड्ढा ने अकेले यह कदम नहीं उठाया है। उनके साथ AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। तकनीकी रूप से, 10 में से 7 सांसद (70%) एक साथ जा रहे हैं, जो संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत आवश्यक ‘दो-तिहाई बहुमत’ की शर्त को पूरा करता है। इसका मतलब है कि इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होगा।
भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों की सूची:
- राघव चड्ढा
- हरभजन सिंह
- स्वाति मालीवाल
- संदीप पाठक
- अशोक मित्तल
- विक्रम साहनी
- रजिंदर गुप्ता
“सही इंसान, गलत पार्टी में” – चड्ढा का बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक होते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने अपनी जवानी के 15 साल इस पार्टी को दिए, लेकिन अब AAP अपने सिद्धांतों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है। मुझे पिछले कुछ समय से महसूस हो रहा था कि मैं एक गलत पार्टी में सही इंसान हूँ।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए इसे राष्ट्रहित में लिया गया फैसला बताया।
AAP के लिए इसके क्या मायने हैं? (Impact Analysis)
- राज्यसभा में ताकत कम: उच्च सदन में आम आदमी पार्टी की आवाज अब बेहद कमजोर हो जाएगी।
- संगठनात्मक झटका: संदीप पाठक जैसे ‘रणनीतिकार’ का जाना AAP के लिए सबसे बड़ी संगठनात्मक क्षति है।
- आगामी चुनाव: इस दलबदल का सीधा असर पंजाब और दिल्ली की राजनीति पर पड़ना तय है।